•
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली… यानी लाखों आखों में समाए ख़्वाबों का शहर, देश की दिशा और दशा बदलने वाली सियासत का मरकज़ और माज़ी की खट्टी-मीठी यादों से भरे तारीख़ के पन्नों में एक बड़ा चैप्टर. लेकिन अगर आप ज़िंदगी की बल खाती सीढ़ियों के ज़रिए क्लाइमेट चेंज से घायल और प्रदूषण से जूझ रही…

•
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छेकहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और दुनिया-जहान में जब भी उर्दू की बात होगी, ग़ालिब याद किए जाएंगे. जब तक उर्दू ज़बान के नाम पर क़लम चलते रहेंगे, जब तक उर्दू लिखने के लिए कोरे काग़ज़ हाथों में उठाए जाएंगे और कुतुबख़ाने (लाइब्रेरी) में जिल्द…

•
अलग-अलग तो हमारा कोई वजूद नहींनदी की ज़ात है पानी हमारी ज़ात नदीनदी हमारे लिए इश्क़ है मुकम्मल इश्क़मियां तुम्हारे लिए होगी वारदात नदी ‘नदी’ शब्द सुनते ही ज़िंदगी की याद ताज़ा हो जाती है. दिमाग़ में जमीन और आकाश के बीच बसी दुनिया की तस्वीर उभरती है. सदियों पुरानी परंपराएं, मान्यताएं और सभ्यताएं…