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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छेकहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और दुनिया-जहान में जब भी उर्दू की बात होगी, ग़ालिब याद किए जाएंगे. जब तक उर्दू ज़बान के नाम पर क़लम चलते रहेंगे, जब तक उर्दू लिखने के लिए कोरे काग़ज़ हाथों में उठाए जाएंगे और कुतुबख़ाने (लाइब्रेरी) में जिल्द…