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अलग-अलग तो हमारा कोई वजूद नहींनदी की ज़ात है पानी हमारी ज़ात नदीनदी हमारे लिए इश्क़ है मुकम्मल इश्क़मियां तुम्हारे लिए होगी वारदात नदी ‘नदी’ शब्द सुनते ही ज़िंदगी की याद ताज़ा हो जाती है. दिमाग़ में जमीन और आकाश के बीच बसी दुनिया की तस्वीर उभरती है. सदियों पुरानी परंपराएं, मान्यताएं और सभ्यताएं…