
आज जिसे ‘स्टॉकहोम सिन्ड्रम’ कहा जाता है, उर्दू शायर अकबर इलाहाबादी ने उसे क़रीब 100 साल पहले ही पहचान लिया था, जब अंग्रेज़ी हुकूमत अपने शबाब पर थी. ‘स्टॉकहोम सिन्ड्रम’ यानी मजबूरी की वो सिचुएशन, जहां किसी क़ैदी को अपने क़ैद कर लेने वाले से ही लगाव पैदा हो जाता है. यहाँ तक कि…